- पेट में ऑपरेशन के बाद अविकसित बच्चा निकाला गया।
- 2.5 किलोग्राम के ढेर के दांत, बाल और हड्डियां थीं।
- ‘फिटस इन फिटू’ बीमारी के कारण भ्रूण पेट में चला गया।
- 18 तक नरेंद्र को अक्सर पेट दर्द, उल्टी की शिकायत रही।
झलवा के पास स्थित ग्राम हरियमपुर, पोस्ट बीखपुर के 18 साल के नरेंद्र कुमार के पेट में बचपन से ही दर्द था। ये दर्द इलाज कराने के बाद ठीक हो जाता था। नरेंद्र की उम्र बढ़ने के साथ दर्द भी बढ़ता जा रहा था। उसकी भूख-प्यास कम होने लगी और उसने खाना-पीना लगभग बंद कर दिया था। कई जगह इलाज कराने के बाद नरेंद्र ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित नारायण स्वरूप हॉस्पिटल में जांच कराया तो अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे व सीटी एब्डोमेन से पता चला कि उसके पेट के बाएं हिस्से में बड़ा सा ट्यूमर है, जो अविकसित बच्चे के रूप में दिख रहा है।
उसकी सर्जरी करने वाले डॉक्टर राजीव का दावा है कि नरेंद्र जब अपनी मां के गर्भ में था, उसी वक्त मां के गर्भ में एक और भ्रूण बन गया जो नरेंद्र का जुड़वा था लेकिन ‘फिटस इन फिटू’ बीमारी के कारण दूसरा भ्रूण नरेंद्र के पेट में चला गया। जन्म के दौरान नरेंद्र के पेट के बाईं ओर सूजन थी लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। 18 साल की आयु तक नरेंद्र को अक्सर पेट दर्द, उल्टी की शिकायत रही। वह कई बार डॉक्टरों को के पास गया लेकिन पेट में विकसित हो रहे बच्चे को चिह्नित नहीं किया जा सका।
डॉक्टर राजीव का दावा है कि चिकित्सा जगत में इस तरह की घटनाएं बहुत की कम हुआ करती हैं। उनके अनुसार दुनिया में अब तक इस तरह के कुल 90 मामले सामने आए हैं। नरेंद्र की हालत अब ठीक है।
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