- पुरुषों को पसंद आती हैं, कर्व वाली महिलायें।
- मनोवैज्ञानिक शोध में सामने आयी बात।
- कमर और कूल्हों के आकार अनुपात का गहरा संबंध।
- कर्वी महिला को देखकर मस्तिष्क में हेरोइन जैसा असर।
इस विषय पर हुए वैज्ञानिक अनुसंधान में यह बात सामने आयी है कि पुरुषों को वह महिलायें अधिक पसंद होती है, जिनके शरीर में अधिक कर्व यानी बल पड़ रहे हों। पुरुषों इन बलों के दीवाने होते हैं। उनका दिल इनमें अटककर रह जाता है। महिलाओं के कूल्हों, कमर और यहां तक कि गले पर पड़ने वाले बल भी पुरुषों को बहुत भाते हैं। इस शोध में यह भी कहा गया कि पुरुषों को वे महिलायें अधिक आकर्षक लगती हैं, जिनकी कमर का आकार कूल्हों के आकार का 60 से 70 प्रतिशत हो। मनोवैज्ञानिक देवेंद्र सिंह के 20 वर्षों तक चले शोध में यह बात सामने आई है। सिंह और न्यूरोसाइंटिस्ट स्टीवन प्लाटेक ने अपने शोध में बताया कि कर्व वाली महिलाओं को देखने के बाद पुरुषों के मस्तिष्क में वैसी ही प्रतिक्रियायें होती हैं, जैसी हेरोइन या कोकीन जैसे नशीले पदार्थों के समय होती हैकभी सोचा है
प्लेबॉय या अन्य किसी फैशन मैगजीन में छपने वाली मॉडल्स की तस्वीरें देखकर कभी न कभी आपके जेहन में सिहरन जरूर हुई होगी। लेकिन, आखिर ऐसा क्यों होता है। दरअसल, पुरुष ऐसी प्रक्रिया द्वारा संचालित होते हैं, जिनके बारे में उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं होता। जिन तस्वीरों को देखकर आमतौर पर पुरुष आह भरते हैं, उनके शरीर आकार 35-23-35 होता है। इसका अर्थ यह है कि उनके कमर का आकार बहुत कम होता है। अब आपको यह समझने की जरूरत है कि क्योंकि उनकी कमर का आकार बहुत कम होता है, इसलिए उनका शरीर अधिक कर्व वाला लगता है।अब इस बात की तुलना किसी सामान्य लड़की से कीजिये। आमतौर पर उनकी कमर का आकार उनके कूल्हों के आकार का 75 फीसदी तक होता है। वहीं, किसी एडल्ट फिल्म स्टार में यह अनुपात 66 तक होता है। इससे, यह बात साफ हुई कि पुरुष सामान्य कमर वाली महिलाओं की अपेक्षा उन महिलाओं को अधिक निहारते हैं जिनका शरीर अधिक 'कर्वी' होता है।
तो, वास्तविकता यह है कि किसी एडल्ट फिल्म स्टार के शरीर के बाकी अंग सामान्य आकार के ही होते हैं, लेकिन क्योंकि उनकी कमर बहुत पतली होती है, इसलिए वे अधिक आकर्षित लगती हैं। यदि किसी पतली महिला की टांगों और कूल्हों पर चर्बी अधिक भी है, तो भी वह पुरुषों को आकर्षित लगती हैं।
मानव मस्तिष्क
इनसानी बच्चों का मस्तिष्क जानवरों के मुकाबले सात गुना अधिक बड़ा होता है। पहले दो वर्षों में इसका विकास सबसे तेजी से होता है। मानवीय मस्तिष्क ओमेगा-3 होता है जिसे डीएचए भी कहा जाता है। यह सब हमारे भोजन से तैयार होता है।बच्चों में इस डीएचए की बहुत जरूरत होती है, जो मां अपने रोजमर्रा के आहार से नहीं दे सकती। मां के दूध में आने वाला डीएचए उसके शरीर में जमा वसा से आता है। इसलिए आप कह सकते हैं कि पहले पैदा हुए बच्चे अपने सहोदरों से अधिक स्मार्ट होते हैं, क्योंकि इस समय मां के शरीर में मौजद डीएचए सबसे अधिक होता है।
लेकिन, इसका इन सब बातों से क्या लेना-देना है। शोध यह मानते हैं कि महिलायें ऑवरग्लास फिगर वाली महिलाओं के शरीर की चर्बी में डीएचए का अधिक होता है। और क्योंकि डीएचए स्वस्थ ओर बेहतर दिमाग के लिए जरूरी होता है, इसलिए वे महिलायें जिनके शरीर में कर्व होता है, उनके बच्चे अधिक स्मार्ट होते हैं।
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